आयुर्वेद का इतिहास

आधुनिक युग में आयुर्वेद की पुनर्जागरण यात्रा

आधुनिक युग में आयुर्वेद की पुनर्जागरण यात्रा (Modern Era Mein Ayurveda Ka Punargrahan / Revival Journey) Focus Keyword: आधुनिक युग में आयुर्वेद की पुनर्जागरण यात्रा परिचय: समय के साथ फिर से उभरता आयुर्वेद भारतीय संस्कृति की सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धति—आयुर्वेद—कभी केवल ग्रंथों और आश्रमों तक सीमित थी, पर आज यह वैश्विक स्तर पर फिर से […]

आधुनिक युग में आयुर्वेद की पुनर्जागरण यात्रा Read More »

आचार्य चरक, सुश्रुत और वाग्भट्ट का योगदान

आचार्य चरक, सुश्रुत एवं वाग्भट का योगदान: आयुर्वेद की तीन महान धाराएँ भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपरा—आयुर्वेद—सिर्फ उपचार पद्धति ही नहीं, बल्कि एक समग्र जीवनशैली का विज्ञान है। इस महान विज्ञान को सुव्यवस्थित रूप देने में तीन महाभारतीय स्तंभों का अतुलनीय योगदान है—आचार्य चरक,आचार्य सुश्रुत और आचार्य वाग्भट। इन तीनों आचार्यों ने अपने-अपने ग्रंथों और

आचार्य चरक, सुश्रुत और वाग्भट्ट का योगदान Read More »

वैदिक काल में आयुर्वेद की नींव कैसे पड़ी

वैदिक काल में आयुर्वेद की नींव कैसे पड़ी? — देवों की विद्या से मानव जीवन तक का प्राचीन सफ़र भारत की प्राचीन सभ्यता केवल धार्मिक या दार्शनिक ज्ञान तक सीमित नहीं रही, बल्कि जीवन के हर पहलू को पूर्णता देने वाली समग्र चिकित्सा पद्धति भी इसी भूमि से जन्मी—और वह है आयुर्वेद।आयुर्वेद की सबसे पहली

वैदिक काल में आयुर्वेद की नींव कैसे पड़ी Read More »

आयुर्वेद

आयुर्वेद की उत्पत्ति: देवों से धरती तक का सफ़र

आयुर्वेद की उत्पत्ति: देवों से धरती तक का सफ़र भूमिका: आयुर्वेद—मानवता को दिया गया एक दिव्य उपहार आयुर्वेद केवल एक वैद्यकीय पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। यह हमारे शरीर, मन और आत्मा—तीनों के संतुलन पर आधारित संपूर्ण विज्ञान है। इस ज्ञान की शुरुआत आज से हजारों वर्ष पहले हुई थी, जब मनुष्य

आयुर्वेद की उत्पत्ति: देवों से धरती तक का सफ़र Read More »

Scroll to Top