आयुर्वेद के मूल सिद्धांत

मन,आत्मा और शारीर का त्रिकोण

मन, आत्मा और शरीर का त्रिकोण: आयुर्वेद में संपूर्ण स्वास्थ्य का आधार भूमिका: स्वास्थ्य केवल शरीर नहीं है आयुर्वेद में स्वास्थ्य को केवल रोगों की अनुपस्थिति नहीं माना गया, बल्कि इसे पूर्ण संतुलन की अवस्था कहा गया है। यह संतुलन केवल शरीर के अंगों या दोषों तक सीमित नहीं है, बल्कि मन, आत्मा और शरीर—इन […]

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मल,मूत्र,स्वेद-शारीर से निकास के तीन मार्ग

मल, मूत्र और स्वेद: शरीर से निकास के तीन अनिवार्य मार्ग  आयुर्वेद में शरीर को केवल मांस, रक्त और हड्डियों का ढांचा नहीं माना गया, बल्कि उसे एक जीवंत, निरंतर क्रियाशील तंत्र के रूप में समझा गया है। यह तंत्र तभी स्वस्थ रहता है जब शरीर के भीतर बनने वाले उपयोगी तत्व बने रहें और

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अग्नि

अग्नि औए आम का रहस्य

अग्नि और आम का रहस्य आयुर्वेद में पाचन, रोग और स्वास्थ्य का मूल विज्ञान आयुर्वेद में अगर किसी एक तत्व को स्वास्थ्य और रोग – दोनों की जड़ कहा जाए, तो वह है अग्नि। और अगर किसी एक तत्व को अधिकांश रोगों की मौन शुरुआत कहा जाए, तो वह है आम।अग्नि और आम का संबंध

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sapt dhatu

सप्त धातु क्या है और शारीर को कैसे बनाते हैं

सप्त (7) धातु क्या हैं और शरीर को कैसे बनाते हैं? भारत की प्राचीन चिकित्सा प्रणाली आयुर्वेद शरीर को एक अत्यंत सुव्यवस्थित, बुद्धिमान और जैविक संरचना मानती है। आधुनिक विज्ञान शरीर को कोशिकाओं, ऊतकों, और अंगों से मिलकर बना मानता है, वहीं आयुर्वेद शरीर की मूल निर्माण-प्रक्रिया को “धातु निर्माण क्रम” के रूप में समझाता

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tridosha

त्रिदोष सिद्धांत: वात, पित्त और कफ का संतुलन

त्रिदोष सिद्धांत: वात, पित्त और कफ का संतुलन – (tridosha in ayurveda) अगर हम आयुर्वेद को एक विशाल वृक्ष मानें, तो उसका आधारभूत तना “त्रिदोष सिद्धांत” है। वात, पित्त और कफ — यही तीनों हमारे शरीर और मन की पूरी गतिविधि को नियंत्रित करते हैं। आयुर्वेद कहता है कि यदि त्रिदोष tridosha संतुलित हैं, तो

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