BLOG

अभ्यारिष्ट: फायदे, उपयोग, सामग्री, सेवन विधि और सावधानियां 

अभ्यारिष्ट: फायदे, उपयोग, सामग्री, सेवन विधि और सावधानियां  भूमिका आयुर्वेद में पाचन तंत्र को स्वास्थ्य की नींव माना जाता है, क्योंकि अगर पाचन शक्ति मजबूत रहती है, तो पूरा शरीर स्वस्थ और ऊर्जावान बना रहता है, लेकिन अगर यह.

Recent Post​

त्रिदोष सिद्धांत: वात, पित्त और कफ का संतुलन

त्रिदोष सिद्धांत: वात, पित्त और कफ का संतुलन – (tridosha in ayurveda) अगर हम आयुर्वेद को एक विशाल वृक्ष मानें, तो उसका आधारभूत तना “त्रिदोष सिद्धांत”...

आधुनिक युग में आयुर्वेद की पुनर्जागरण यात्रा

आधुनिक युग में आयुर्वेद की पुनर्जागरण यात्रा (Modern Era Mein Ayurveda Ka Punargrahan / Revival Journey) Focus Keyword: आधुनिक युग में आयुर्वेद की...

आचार्य चरक, सुश्रुत और वाग्भट्ट का योगदान

आचार्य चरक, सुश्रुत एवं वाग्भट का योगदान: आयुर्वेद की तीन महान धाराएँ भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपरा—आयुर्वेद—सिर्फ उपचार पद्धति ही नहीं, बल्कि एक...

वैदिक काल में आयुर्वेद की नींव कैसे पड़ी

वैदिक काल में आयुर्वेद की नींव कैसे पड़ी? — देवों की विद्या से मानव जीवन तक का प्राचीन सफ़र भारत की प्राचीन सभ्यता केवल धार्मिक या दार्शनिक ज्ञान तक...
Scroll to Top