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अभ्यारिष्ट: फायदे, उपयोग, सामग्री, सेवन विधि और सावधानियां 

अभ्यारिष्ट: फायदे, उपयोग, सामग्री, सेवन विधि और सावधानियां  भूमिका आयुर्वेद में पाचन तंत्र को स्वास्थ्य की नींव माना जाता है, क्योंकि अगर पाचन शक्ति मजबूत रहती है, तो पूरा शरीर स्वस्थ और ऊर्जावान बना रहता है, लेकिन अगर यह कमजोर पड़ जाए या किसी कारण से विकृत हो जाए, तो कई तरह की बीमारियां जन्म […]

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पंचमहाभूत सिद्धांत

पंचमहाभूत का सिद्धांत: आयुर्वेद में सृष्टि, शरीर और स्वास्थ्य का आधार आयुर्वेद केवल रोगों का उपचार नहीं है, बल्कि यह जीवन को समझने की एक गहरी और वैज्ञानिक दृष्टि है। आयुर्वेद के अनुसार यह पूरा ब्रह्मांड—चाहे वह मानव शरीर हो, प्रकृति हो या ब्रह्मांडीय ऊर्जा—पाँच मूल तत्वों से बना है। इन्हीं पाँच तत्वों को पंचमहाभूत

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बुखार से राहत देने वाले घरेलू उपचार

बुखार से तपते शरीर को ठंडक दें: नैचुरल घरेलू उपचार

बुखार से तपते शरीर को ठंडक दें: नैचुरल घरेलू उपचार बुखार अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह शरीर का एक संकेत होता है कि अंदर कहीं संक्रमण, सूजन या असंतुलन चल रहा है। जब तापमान 99°F से ऊपर जाता है, तो शरीर भारी लगने लगता है, सिर भारी हो जाता है, कंपकंपी

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पंचकर्म(Panchkarma)

पंचकर्म (Panchkarma): शरीर और मन की संपूर्ण शुद्धि का आयुर्वेदिक विज्ञान परिचय: पंचकर्म क्या है? “पंचकर्म” — यह शब्द दो शब्दों से बना है — ‘पंच’ अर्थात पाँच, और ‘कर्म’ अर्थात क्रिया या प्रक्रिया।आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में जब दोष (वात, पित्त, कफ) असंतुलित हो जाते हैं, तब विभिन्न रोग उत्पन्न होते हैं। इन दोषों

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आयुर्वेद जीवन का विज्ञान

Ayurved Jivan Ka Vigyan: आधुनिक जीवन में आयुर्वेद का असली विज्ञान परिचय (Introduction) “Ayurveda Jivan Ka Vigyan”—यह सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि एक गहरा दर्शन है। आयुर्वेद सिखाता है कि जीवन केवल शरीर का नाम नहीं, बल्कि मन, आत्मा और प्रकृति का सुंदर संतुलन है। आज की तेज़ रफ़्तार जिंदगी में लोग तनाव, अनिद्रा, थकान,

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आधुनिक जीवन में आयुर्वेद

आधुनिक जीवन में आयुर्वेद — तेज़ रफ्तार दुनिया में स्वास्थ्य का प्राकृतिक समाधान आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, लगातार बढ़ता तनाव, अनियमित खानपान और प्रदूषण ने स्वास्थ्य को सबसे बड़ी चुनौती बना दिया है। ऐसे समय में आयुर्वेद केवल इलाज का तरीका नहीं बल्कि जीवन को संतुलित और स्वस्थ तरीके से जीने की पूर्ण पद्धति

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मन,आत्मा और शारीर का त्रिकोण

मन, आत्मा और शरीर का त्रिकोण: आयुर्वेद में संपूर्ण स्वास्थ्य का आधार भूमिका: स्वास्थ्य केवल शरीर नहीं है आयुर्वेद में स्वास्थ्य को केवल रोगों की अनुपस्थिति नहीं माना गया, बल्कि इसे पूर्ण संतुलन की अवस्था कहा गया है। यह संतुलन केवल शरीर के अंगों या दोषों तक सीमित नहीं है, बल्कि मन, आत्मा और शरीर—इन

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मल,मूत्र,स्वेद-शारीर से निकास के तीन मार्ग

मल, मूत्र और स्वेद: शरीर से निकास के तीन अनिवार्य मार्ग  आयुर्वेद में शरीर को केवल मांस, रक्त और हड्डियों का ढांचा नहीं माना गया, बल्कि उसे एक जीवंत, निरंतर क्रियाशील तंत्र के रूप में समझा गया है। यह तंत्र तभी स्वस्थ रहता है जब शरीर के भीतर बनने वाले उपयोगी तत्व बने रहें और

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